बी.एन.एम कॉलेज बड़हिया

B.N.M COLLEGE BARAHIYA

बी.एन.एम कॉलेज बड़हिया (जिला-लखीसराय) जिसकी स्थापना 1958 में स्व० गोपेश्वर प्रसाद सिंह पिता- स्व० रामेश्वर प्रसाद सिंह उर्फ़ विलायती बाबू ने अपने अग्रज स्व० बद्री नारायण मुक्तेश्वर प्रसाद सिंह के सपनो को पूर्ण करने के उदेश्य से की उन्होंने इसके लिए काफी परिश्रम किया।

महाविद्यालय का प्रारंभ उच्च विद्यालय बड़हिया के पश्चिमी खंड में अस्थाई तौर पर किया गया तथा छात्रों की पढाई प्राप्तःकाल में होती थी ताकि उच्च विद्यालय का कार्य बाधित न हो।

उस वक्त यह वर्तमान लखीसराय जिला का इकलौता डिग्री कॉलेज था जिसमें सिर्फ कला (ARTS) संकाय के विषयों की पढाई होती थी। शासी निकाय के द्वारा महाविद्यालय का संचालन होता था जिसमें सचिव स्व० गोपेश्वर प्रसाद सिंह जी प्रारंभ से अंत तक रहे प्रथम अध्यक्ष तत्कालीन सिंचाई मंत्री (बिहार सरकार) स्व० महेश प्रसाद सिंह तथा बाद में लाला बाबू एवं अन्य हुए।

इस महाविद्यालय के संबंधन सर्वप्रथम बिहार विश्वविद्यालय से मिला बाद में बिहार विश्वविद्यालय का ही एक नवगठित भागलपुर विश्वविद्यालय से सम्बंधित हुआ। अब वाही विश्वविद्यालय तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय बना। 1962 में महाविद्यालय को अपना एक भवन हुआ जिसमें स्थानांतरित होकर सुचारू ढंग से पठन-पाठन होने लगा।

इस कॉलेज को 1968 में अपना विज्ञान संकाय का संबंधन प्राप्त हुआ और 1969 से जीव विज्ञान की पढाई शुरू हुई। काफी उत्साह से ओत प्राते शिक्षक एवं छात्र छोटे से भवन में पाठन पाठन में लीं हो गए. 1970 से विश्वविद्यालय की राजनीतिक साजिश के तहत ओस महाविद्यालय को बर्बाद करने का खेल शुरू हुआ जो 1976 तक चला परन्तु 1977 में अंगीभूतिकरण के पश्चात् पुनः महाविद्यालय में नए उर्जा का संचार हुआ। प्राचार्य बदलते गए, व्यवस्था बदलती गयी जिसके परिणाम स्वरुप उतार-चढाव होते रहे।

2000 ई० में डॉ० रामाश्रय यादव कुलपति के रूप में विश्वविद्यालय में पदस्थापित हुए। उनके कार्यकाल में न सिर्फ एक नयी आना संचन हुआ बल्कि विकास का दौर शुरू हुआ। बुनियादी ढांचा का विकास हुआ तथा उतार्द में कठोर अनुशासन एवं प्रशासन भी कॉलेज में देखने को मिला लेकिन विश्वविद्यालय से डॉ० रामाश्रय यादव के इस्तीफा के बाद जो पूरे विश्वविद्यालय की व्यवस्था मंल गिरावट आई उससे यह कॉलेज भी अछूता नहीं रहा। आज तो पूरे बिहार के उच्च शिक्षा की बदहाली सर्वविदित है। बारह विषयों (प्रतिष्ठा के साथ) को पढ़ने के लिए मात्र पाँच शिक्षक तथा छात्रों की उपस्थिति शून्य। कर्मचारी की संख्या एक तिहाई बची। यानि कॉलेज के नाम पर सिर्फ भवन और कागजी खाना पुरी।

BNM COLLEGE BARHIYA  BNM COLLEGE BARAHIYA  B.N.M COLLEGE BARHIYA  B.N.M COLLEGE BARAHIYA

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!