बड़हिया की पहलवानी, बड़हिया के अखाड़े और पहलवान ।।

पहलवानी/कुश्ती का शौक यंहा कुछ ऐसा लोकप्रिय था की अमीर गरीब सभी घरों के लड़के अभ्यास करते थे. बहुत समय तक तो प्रत्येक परिवार का एक व्यक्ति अवश्य ही इसका अभ्यास करता था की संकट के समय परिवार की रक्षा कर सके. कुश्ती की शिक्षा अभ्यास के लिए बड़हिया में अखाड़े कायम थे।

● प्रत्येक अखाड़े के एक उस्ताद थे जिनकी मर्यादा और प्रतिष्ठा उनके शिष्यों के बीच दीक्षा गुरु की तरह ही थी। यह उस्ताद अभ्यास, भोजन एवं संयम के मामले में अपने प्रत्येक शिष्य पर कड़ी नजर रखता और कठोरता से अनुशासित करता था, शिष्य की सफलता पर वे अपनी सफलता से भी अधिक संतोष लाभ करते थे और अभिमान रखते थे।

कुछ उल्लेखनीय उस्ताद एवं उनके अखाड़े निम्नलिखित है:

1.  जितुलाल सिंह  ——-   जितुलाल जी अखाड़ा

2.  रामाश्रय बाबू  ——-   रामाश्रय बाबू अखाड़ा

3.  शिवटहल सिंह  ——-  जागीरदार

4.  देवनाथ सिंह   ——–  राधामोहन मंदिर में

5.  हरगौरी सिंह  ——-   बद्रीदास जी के मंदिर में

6.  हरदयाल सिंह  ——   श्यामसखा जी के मंदिर में

7.  छोटू सिंह  ——   देवदास मंदिर में

8.  धीरज सिंह  ——-   राजा जी मंदिर में

9.  रामाश्रय सिंह  ——   भवानी जी मंदिर में

10. चतुर्भुज सिंह  ——   चतुर्भुज सिंह अखाड़ा

इनमें तीन अखाड़े प्रमुख थे:

1. जितुलाल अखाड़ा

2. रामाश्रय बाबू अखाड़ा

3. राधामोहन अखाड़ा

इन तीन अखाड़ों के कुछ प्रमुख दिग्गज पहलवान निम्नलिखित है :-

रामाश्रय बाबु अखाड़ा :- श्याम किशोरे सिंह, राम किशोर सिंह, हरदयाल सिंह, विश्वनाथ, श्यामली पहलवान, अंतु पहलवान, हरदेव पहलवान, धीरजी सिंह बड़ा, धीरजी सिंह छोटा, शोसन पहलवान, केदार सिंह पहलवान

जितुलाल जी अखाड़ा :- मुंशी सिंह पहलवान, केशो सिंह, अयोध्या सिंह, धनुकधारी सिंह पहलवान, जितु सिंह, कामता पहलवान, विश्वनाथ पहलवान, रक्षा सिंह, नुनुबाबू पहलवान, रामगुलाम सिंह पहलवान, रामचंद्र पहलवान, जनार्दन सिंह, विशो सिंह, नकट सिंह, भागी सिंह, सहदेव सिंह, परमानन्द पहलवान, वैधनाथ पहलवान

राधा मोहन अखाड़ा :- देवनाथ सिंह, जादो सिंह, जगदेव पहलवान, सुदामा पहलवान, शिवु पहलवान, बाल्मिकी पहलवान, कुरु पहलवान, भासो सिंह पहलवान

कुछ और दिग्गज पहलवानों के नाम निचे निम्नलिखित है परन्तु उनके अखाड़े देना संभव नहीं हो पाया है। :-

लूटन पहलवान, रामबालक पहलवान, रमावल्लभ पहलवान, शिवसहाय पहलवान, रामसहाय पहलवान, लोकी पहलवान, भोला पहलवान, इंद पहलवान, गीता प्रसाद सिंह पहलवान, सिया पहलवान, बुधन पहलवान, जाटो पहलवान, नरेश पहलवान, धीरज पहलवान, दाऊ पहलवान, रामेश्वर पहलवान, रामाश्रय पहलवान, चंद्रेश्वर पहलवान, राजेंद्र पहलवान, धीबी पहलवान, विन्देश्वरी पहलवान, छोटू पहलवान, बनवारी पहलवान

जागीरदारों में से भी अनेक पहलवान हुए: बाबु शिवटहल सिंह

बाबु महेश सिंह के परिवार ने धन ऐश्वर्य और प्रभाव में जिस प्रकार ख्यति अर्जित की और पहलवान भी अति उच्य कोटि के उत्पन किये. इस परिवार के भुवन पहलवान, मोती पहलवान, पोखा पहलवान, लोधा पहलवान, अम्बिका पहलवान, द्वारिका पहलवान , तिल्लू पहलवान , रामगुलाम पहलवान , जीतन पहलवान विख्यात पहलवान हुए

■ भुवन सिंह का वजन 18 मन (620 किलो) बताया जाता था।
■ अम्बिका सिंह 11 मन (480 किलो) बताया जाता था।

● 20 किलो दूध, 4 किलो आटा, 4 किलो शकर, 20 किलो आलू, इन पहलवानों का नित्य साधारण भोजन था. फलाहार 500 आमों से कम का नहीं होता था और केले का एक घौदा. मेवा और सूखे फल बैलगाड़ियों पर पटना से लाया जाता था. इनको देखे बिना, इनकी करामातों को देखे बिना लोगों को इसके विषय में प्रचलित कहानियों पर विश्वास करना कठिन होता था. भरपेट भोजन उपरांत भुजा किलो-दो किलो और समूची चारपाई पर फैलाया हुआ आंचार एक बार ही खा लेते थे।

● एक पहलवान को एक सप्ताह का भोजन (कलेवा) देकर टाल के खेत का झाड़ पीटने भेज गया था तो वह दो ही दिन में सारा काम और सारा कलेवा भी समाप्त कर लौट आये थे।

● कामता पहलवान सदा स्मरणीय है. प्रान्त में घूम घूम कर यश अर्जन किया. 1934 की हरिजन यात्रा में गाँधी जी की प्राण रक्षा देवघर के रेलवे स्टेशन पर इन्ही के पराक्रम से हुई थी।

● बाबु हरदयाल सिंह इनके लड़के और पौत्र सभी मशहूर पहलवान हुए. इनके परिवार में इनके भाई और लड़के कोई भी साढ़े छह फीट से कम ऊँचे नहीं थे. इनके एक पुत्र श्यामकिशोर सिंह ने 21 वर्ष की पटना, प्रयाग, मथुरा, दिल्ली,जलंधर आदि जाकर चौवे, जाट, पठान, राजपूत और पछांह पहलवानों से मोर्चा लिया एवम बराबर विजय प्राप्त की थी।

● संदेह किया जाता है की शत्रुतावस ही किसी ने उन्हें विष देकर 21 वर्ष की अवस्था में मथुरा में मार डाला. इनके छोटे भाई बाबु बद्री नारायण सिंह को देखने वालों की भीड़ लगी रहती थी. वे सांढ़ों से लड़ते थे, दीवारों पर शहतीर चढ़ा देते थे. इनका रंग रूप आकर इमाम बखस और गामा की याद दिलाता था।

● बाबु हरदयाल सिंह के एकमात्र पुत्र श्री रामाश्रय बाबु अपने समय के दिग्गज पहलवान समझे गए. जबकि अपने परिवार में यह सबसे छोटा और हलके पहलवान माने जाते थे।

● यहाँ का कुश्ती का शौक इतना था की यंहा प्रायः दंगल का आयोजन हुआ करता था।

● देश और विदेश के नामी और मशहूर पहलवानों का दंगल होता यंहा सात समुन्दर पार अफगानिस्तान तक के पहलवान दंगल में आये है और बाजी जीतने वालों को इनाम दिया जाता।

● कुछ मशहूर पहलवानों के नाम निम्न है जिनने जौहर यंहा आकर दिखलाये: बुझावन नट, छोटा पूरण, बड़ा पूरण, अदालत, शादिवेग, पहलवान, सुखदेव ओझा, बलदेव ओझा, गुलाम अहमद, भूरे, जंगा, चन्द्रगौसा, सोना, ठाकुर मंगल, प्रताप, रहीम बक्स इत्यादि।

● कुश्ती में इस्तेमाल किये जाने वाले कुछ दाव पेंच के स्थानीय नाम: दस्ती, उघेड़, धिस्सा, तंग, बहरली, धोबियापाट, मछिगोता, कलाजंग, मुल्तानी।

● नयी शिक्षा, सभ्यता के प्रचार, जनसँख्या की वृद्धि, अवकाश की कमी एवम शुद्ध और पुष्ट भोजन के अभाव के कारन इस कला का हास हो गया है या होता जा रहा है परन्तु अभी इसका अंत नहीं हुआ है, अन्य स्थानों की अपेक्षा अभी भी यंहा प्रगति संतोषजनक है।

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