बड़हिया और राजनीति

बड़हिया का राजनैतिक इतिहास : एक छोटा अवलोकन

मोक्षदायिनी भागीरथी गंगा के तट पर जगत जननी माँ बाला त्रिपुर सुन्दरी को शरण में अवस्थित बड़हिया गाँव आर्थिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं राजनैतिक धरातल पर सादा-सर्वदा चर्चनीय रहा है।  सन् 1969 ई० में उच्च विधालय बड़हिया के प्रशाल में आयोजित राज्यस्तरीय कवि गोष्ठी में अध्यक्षीय उदबोधन में महाकवि रामदयाल पांडेय ने कहा था। अपने बड़हिया में मरद और बरद अद्वितीय है, इन दोंनो के कारण बड़हिया ने जो राज्य स्तरीय ख्याति अर्जित अर्जित की है, वह काबिले तारीफ है।

● साहित्य कला, शिक्षा, संस्कृति राजनीति आदि क्षेत्रों को अपनी भावयित्री और कारयित्री प्रतिभा से प्रोदभाषित करने वाला यह गाँव सचमुच में बिहार राज्य के गाँवो का बादशाह है। इसके सौंदर्य और खुशबू से लोग अभिभूत है। महाकवि पांडेय जी की धारणा के दर्पण में इस गाँव का जो विम्ब उभरता है, वह जीवंत प्रेरक और उदाहरणीय है इतिहास के पृष्ठ बोलते है कि गुलामी का लौह श्रृंखला में आवद्ध भारत माता को देख कर यहां के युवकों की जवानी कसमसाने लगी थी।

● इन्होनें राष्ट भक्ति की मंदिरा को पी कर देश की वेदी पर अपना सर्वत्र अर्पित करने का कठोर संकल्प लिया। महात्मा गाँधी और बिहार केसरी डा० श्रीकृष्ण सिंह के आहवान पर गोरी सरकार के विरूद्ध क्रांति का तूर्यनाद किया। अंग्रजो की लाठियो खाई। भारत भूमि से फिरंगियो को खदेड़ने के लिए जेल यात्राएँ की। जेल में सड़े गले आंटे की रोटियाँ खाई। अंगे्जों के जोर जुल्म के आगे नतमस्तक न होकर पूरे जोश और उत्साह के साथ भारत माता की जय बोलते रहे।

● बड़हिया वासियों के पराक्रम और राष्ट प्रेम पर प्रकाश डालते हुए तत्कालीन बिहार उड़ीसा की सरकार 1931-32 ई० के अपने प्रतिवेदन की पृष्ठ संख्या 2 और 5 पर लिखा है कि मुंगेर जिला का बड़हि गाँव जो वर्तमान में बड़हिया नाम से जाना जाता है, नियम कानून से लोहा लेने में विख्यात है इसलिए अंग्रेज शासक ने सता और सम्पति के रक्षार्थ विशेष सशस्त्र पुलिस बल को यत्र तत्र तैनात किया था।

● मगर यहाँ के साहसी और निडर आंदोलनकारी छाती ठोक कर अंग्रेजी सल्तनत का मुखालफत करते रहे। इस क्षेत्र के अनेकानेक ज्ञात आज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के तप, त्याग, संघर्ष और जुझारूपन के उल्लेख के बिना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास अधूरा ही माना जायेगा । समय बड़े चाव से इन आत्महन्ता स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन वृत को प्रकाश में लाने की माँग कर रहा है।

● आजादी से पहले और बाद के दिनों में भी इस क्षेत्र के लोग राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे है। बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डा० श्रीकृष्ण सिंह के साथ बड़हिया के लोकप्रिय एवं दबंग क्रांग्रेसी नेता यमुना बाबू का अत्मीय संबंध था। श्री बाबू के सम्पर्क और सानिध्य से इन्होंने …. की छोटी बड़ी समस्याओं के निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रामरीझन बाबू उर्फ ‘चू भाई’ कपिलदेव बाबू, सूर्य नारायण बाबू, चन्द्रभान बाबू, जुलुमधारी बाबू, काशी बाबू एवं बांके बाबू ने न केवल आजादी की लड़ाई व राजनीति के विभिन्न पदों पर आसीन हुए, अपितु शिक्षा और संस्कृति के उन्नयन में काफी योगदान किया।

● श्री कपिलदेव सिंह अपने आजसिवत व्यकितत्व एवं बहुआयामी कर्तव्य के बल पर स्वयं को एक प्रखर चिन्तक और ओजस्वी वक्ता के रूप में बिहार के राजनीति में सराहनीय कीर्ति अर्जित की। विपक्षी नेता के नाते विधानसभा में दबंगता के साथ बिहार सरकार की गलत नीतिये और कार गुजारियो पर जमकार कशाघात करते थे। इनकी अध्ययनशीलता अपरिमेय थी। इन्होन अपनी सुयोग्यता सिद्ध कर दी थी। कि ज्ञान उपाधियो मे नहीं बसता है। ये रामनोहर लोहिया की तरह समाजवादी दर्शन के आख्याता स्पष्टवादी और छक्कामार भाषा के प्रयोक्ता थे।

● बिहार विधान सभा मे जब ये बोलने के लिए खड़े होत थे, तब विपक्ष और सता पक्ष के सदस्य इन्हें बड़े गौर से सुनते और इनके विचारो को गुनते थे। कभी कभी तो इनके पूरक प्रश्नों से परेशान होकर विभागीय मंत्री समुचित उत्तर के लिए समय मांग लिया करते थे। जब बिहार में संविद सरकार के खाध आपूर्ति एवं कृषि मंत्री के रूप में इनकी प्रशासनिक क्षमता राजनौतिक सूझ-बूझ और अनूठी कार्य शैली चिरस्मरणीय रहेगी। समाजवादी पार्टी के प्रधान राष्टीय महासचिव के रूप में में इन्हाने राष्टीय पर अमिट छाप छोड़ी थी।

● बड़हिया की राजनीति को राज्य की राजनीति से जोड़ने वाले नेताओ में रामरीझन बाबू उर्फ ‘चू भाई’ का नाम आदरपूर्वक लिया जाता रहेगा। इनमें जरूरत से ज्यादा विनम्रता और सज्जनता थी। मुंगेर जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष लोक लबोर्ड मुंगेर से अध्यक्ष एवं मान सम्मान को बढ़ाने की दिशा में निष्पृह भाव से कार्यरत रहे। इनकी सादगी मृदुभाषिता और चारित्रिक सौष्ठव से प्रेरणा ग्रहण करने की आवश्यकता सदैव बनी रहेगी। बड़हिया की राजनीति में नया रंग भरने में अश्विनी कुमार शर्मा को कभी भुलाया नहीं जा सकता है।

● बिहार विधान सभा के सदस्य के रूप में जहाँ ये क्षेत्र के विकास में मनसा वाचा कर्मणा सक्रिय रहे वहीं अपनी ही सरकार के कारनामों को भी उजागर करते रहे। इस युवा का कांग्रसी विधायक को नयी पीढ़ी को अनी ओर आकर्षित करने में यथेष्ट सफलता मिली थी। बड़हिया क्षेत्र के प्रतापपुर गाँव के श्रमिक नेता सिदेश्वर प्रसाद सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर विधान सभा पहुंचे थे। बिहार सरकार में मंत्री पद पर आसीन होकर क्षेत्र के प्रतिष्ठा में वृद्धि की थी। इस लोकप्रिय नेता को कभी विस्मृत नहीं किया जा सकता है।

● बड़हिया गाँव के सपूत कर्मठ ईमानदार और चरित्रवान भारतीय पुलिस सेवा के पुलिस पदाधिकारी ललित विजय सिंह (I.P.S) ने बेगुसराय संसदीय लोकसभा चुनाव क्षेत्र से चुनाव जीतकार भारत सरकार में रक्षा मंत्री के पद को सुशोभित को गौरवानिवत किया था। रक्षा मामलों के सवालो के सुलझाने में इन्होने जो महत्वपूर्ण निर्णय लिये उसकी भूरि: प्रशंसा की गई। इनकी पैनी दृषिट हर पल क्षेत्र के समग्र उत्थान पर गड़ी रहती थी। अनेक बेरोजगार युवको को जीविका देकर इन्होने महाननीय काम किया था।

● वर्तमान में बड़हिया गाँव में कर्मयोग एवं तेजस्वीनेता गिरिराज सिंह बड़हिया की प्रतिष्ठा में वृद्धि कर रहे है। ये भारतीय जनता पार्टी के दबंग नेता के रूप में सर्वविदित है। ये सर्वप्रथम बिहार विधान परिषद के सदस्य बने। तत्पश्चात बिहार में ारिता मंत्री, फिर पशु पालन एवं मत्स्य विभाग के मंत्री पद को नवालोक से मांज रहे है। इस युवा मंत्री से बड़हिया क्षेत्र को बड़ी आशाएँ है।

● बड़हिया की राजनीति में इस परिक्षेत्र के सांसदो व विधायको की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बेगूसराय और मुंगेर संसदीय क्षेत्र का यह प्रमुख हिस्सा रहा है। ग्रामीण राजनीतिज्ञों के अलावा सांसद के रूप में श्रीमती कृष्णा शाही ने अहम भूमिका निभाई है। महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

● बड़हिया लखीसराय विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है। ग्रामीण विधायकों के अलावा श्री कृष्णचन्द्र प्र० सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता है। इनके अलावे यदुवंश प्रसाद सिंह फुलैना सिंह आदि की भी भूमिका रही है।

● वर्तमान विधायक श्री विजय कुमार सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका को याद करना भी जरूरी है सामान्य राजनीति से उपर उठकर कार्य करने की इनकी शौली सराहनीय है।

● बड़हिया उच्च विधालय का शताब्दी वर्ष मनाना और इस उपलक्ष्य पर शताब्दी-साहित्य का प्रकाशन राजनीति से उपर उठकर काम करने का संदेश है। पूरे लखीसराय सहित बड़हिया के विकास की इनकी विशेष कोशिश सराहनीय है।

आरंभ से ही बड़हिया की राजनीति संवेदनशील और जागरूक रही है। चाहे किस दल की सरकार हो उसकी गलत नीतियों का विरोध प्रबुद्ध लोगे ने हमेशा उची आवाज में किया है। किसान आंदोलन हो चाहे आक्षण विरोधी आंदोलन हो चाहे जनहित विरोधी सरकारी आदेश हो इनत माम गलत निर्णयों के विरोध करने में यहाँ के लोग दलगत भावना से उपर उठकार अपनी आन्तरिक उर्जा का परिचय देते रहे है। इस परम्परा का उच्छेदन न होने पावे। राजनीति में शून्यता न आने पावे, विरोध की धार कम न होने पावे और चाटुकारिता का घृण्य प्रकृति पनपने न पावे, इसके लिये सजग और सावाधान रहना आवश्यक ही नहीं अनिवार्य भी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!